Baba Mastnath University, Rohtak, a private self – financing University, blossomed under the aegis of Shri Baba Mastnath Math, Asthal Bohar in 2012 under Haryana Private Universities Act 2006. BMU has achieved significant academic growth and development in the field of professional and health sciences education over the last one decade. Guided by well-defined, clearly articulated Vision, Mission and Goals the BMU is the all- inclusive platform for diverse fields of career such as B.A.M.S, Pharmacy, Management, Law, Engineering, Science, Humanities, Commerce, Nursing and much more. Organizational values of transparency, participative management and decentralization are reflected in internal quality assurance efforts, modernization of the examination system, regular meetings of the Heads of Department and various statutory and non-statutory bodies. University has introduced an Annual Quality Assurance Exercise attesting to the pursuit of quality in all aspects at all times. In keeping with global trends in Higher Education, University imparts to all students a globally relevant and locally applicable curriculum of international standard. Outcome and Skill based training is achieved through the Clinical Skill Labs, Cadaveric Skill Labs, an active Medical Education Training Unit, adoption of the latest pedagogy and assessment methods. Incorporation of research in both UG and PG programmes, evidence-based teaching, interactive and case-based learning, early clinical exposure, industry-academia collaborations, remedial classes and emphasis on field and community-based visits ensure our graduates are competitive for both Higher Education and employment opportunities. Holistic student development is a priority. Measures such as University Moral Guidance Scheme, Student Guardianship Programme, Student Councils, PG Club, NSS, Women Development Cell, Internal Complaint Cell, Anti-Discrimination Cell, Students Grievance Cell, Entrepreneurship Cell, Anti-Ragging Cell, Students Welfare Cell, all contribute to providing a motivating and supportive environment conducive to optimizing personal and professional potential of students.


All the technical and professional programmes are approved by various regulatory bodies - UGC, AICTE, NCTE, BCI, INC, PCI, CCIM, etc.

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Alumni

आध्यात्मिक भूमि पर प्रतिष्ठित एक विश्वविद्यालय


  अस्थल बोहर का यह प्राचीन मठ आठवीं शताब्दी से लेकर अब तक जनकल्याण, समाज-सेवा एवं राष्ट्रोत्थान के अनेक उपक्रमों के प्रति संकल्पबद्ध है। यह मठ आमजन व संतों को दीक्षित करके आत्म-साक्षात्कार तथा जनकल्याण में प्रवृत होने की प्रेरणा देता आया है। यहाँ से दीक्षा प्राप्ति के बाद अनेक नाथ योगियों ने उक्त उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए इस अस्थल बोहर मठ का आश्रय लिया है। उत्तरी भारत में चैरंगीनाथ जी की तपःस्थली सारे भारतवर्ष में प्रसिद्ध है। यह तपःस्थली नाथपंथ में आई पंथ की एक महत्त्वपूर्ण गद्दी मानी जाती है। इस स्थान पर आई पंथ के साधु बाबा श्री मस्तनाथ जी ने घोर तपस्या की तथा इस स्थान का जीर्णोंद्धार करके अस्थल बोहर मठ की स्थापना की। वे गुरु गोरक्षनाथ जी के अवतार माने जाते हैं। उन्होंने अपनी कठोर तपस्या एवं अपार सिद्धियों से यह सिद्ध भी करके दिखाया। परिणामस्वरूप जनमानस उन्हें सतत् गोरख अवतारी कहने लगे। बीसवीं सदी में गद्दी के महंत श्री श्रेयोनाथ जी अपने समय के जाने-माने वैद्य थे तथा सन् 1978 ई॰ में हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री भी रहे। वे चाहते थे कि कोई कर्मठ और शिक्षित साधु इस गद्दी का वारिस बने। इस रूप में चाँदनाथ जी योगी को अपना उत्तराधिकारी चुना। महंत चाँदनाथ जी योगी (पूर्व सांसद-अलवर लोकसभा, राजस्थान) ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक उत्कृष्ट कार्य करके अलवर क्षेत्र को विकास के नये आयाम प्रदान किये। महाराज जी ने सन् 2012 ई॰ में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना की। इससे पहले यहाँ अनेक पाठयक्रम संचालित थे, लेकिन विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने में महंत चाँदनाथ जी योगी का अहम योगदान रहा। जो पौधा उन्होंने लगाया था वह आज दिन-प्रतिदिन नई ऊँचाइयों को छू रहा है। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि उन्होंने जो सपना देखा था, वह निरंतर अपनी ऊँचाइयों को छूते हुए नई मिसाल कायम कर रहा है। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलाधिपति महंत बालकनाथ जी योगी (सांसद-अलवर लोकसभा क्षेत्र, राजस्थान) के निर्देशन में यह विश्वविद्यालय दिन-प्रतिदिन उन्नति और विस्तार के नए कीर्तिमान हासिल कर रहा है।

आध्यात्मिक भूमि पर प्रतिष्ठित एक विश्वविद्यालय


  अस्थल बोहर का यह प्राचीन मठ आठवीं शताब्दी से लेकर अब तक जनकल्याण, समाज-सेवा एवं राष्ट्रोत्थान के अनेक उपक्रमों के प्रति संकल्पबद्ध है। यह मठ आमजन व संतों को दीक्षित करके आत्म-साक्षात्कार तथा जनकल्याण में प्रवृत होने की प्रेरणा देता आया है। यहाँ से दीक्षा प्राप्ति के बाद अनेक नाथ योगियों ने उक्त उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए इस अस्थल बोहर मठ का आश्रय लिया है। उत्तरी भारत में चैरंगीनाथ जी की तपःस्थली सारे भारतवर्ष में प्रसिद्ध है। यह तपःस्थली नाथपंथ में आई पंथ की एक महत्त्वपूर्ण गद्दी मानी जाती है। इस स्थान पर आई पंथ के साधु बाबा श्री मस्तनाथ जी ने घोर तपस्या की तथा इस स्थान का जीर्णोंद्धार करके अस्थल बोहर मठ की स्थापना की। वे गुरु गोरक्षनाथ जी के अवतार माने जाते हैं। उन्होंने अपनी कठोर तपस्या एवं अपार सिद्धियों से यह सिद्ध भी करके दिखाया। परिणामस्वरूप जनमानस उन्हें सतत् गोरख अवतारी कहने लगे। बीसवीं सदी में गद्दी के महंत श्री श्रेयोनाथ जी अपने समय के जाने-माने वैद्य थे तथा सन् 1978 ई॰ में हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री भी रहे। वे चाहते थे कि कोई कर्मठ और शिक्षित साधु इस गद्दी का वारिस बने। इस रूप में चाँदनाथ जी योगी को अपना उत्तराधिकारी चुना। महंत चाँदनाथ जी योगी (पूर्व सांसद-अलवर लोकसभा, राजस्थान) ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक उत्कृष्ट कार्य करके अलवर क्षेत्र को विकास के नये आयाम प्रदान किये। महाराज जी ने सन् 2012 ई॰ में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना की। इससे पहले यहाँ अनेक पाठयक्रम संचालित थे, लेकिन विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने में महंत चाँदनाथ जी योगी का अहम योगदान रहा। जो पौधा उन्होंने लगाया था वह आज दिन-प्रतिदिन नई ऊँचाइयों को छू रहा है। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि उन्होंने जो सपना देखा था, वह निरंतर अपनी ऊँचाइयों को छूते हुए नई मिसाल कायम कर रहा है। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलाधिपति महंत बालकनाथ जी योगी (सांसद-अलवर लोकसभा क्षेत्र, राजस्थान) के निर्देशन में यह विश्वविद्यालय दिन-प्रतिदिन उन्नति और विस्तार के नए कीर्तिमान हासिल कर रहा है।

management

Hon'ble Chancellor


Mahant Balaknath Ji Yogi


सिद्ध शिरोमणि श्री बाबा मस्तनाथ जी महाराज की तपस्थली के पावन प्रांगण में मेरे दादा गुरु योगिराज श्रीयुत् महंत श्रेयोनाथ जी के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में लगाये गये एक मात्र पौधे को मेरे पूज्य गुरूदेव महन्त श्री चाँदनाथ जी महाराज ने अपनी दूर दृष्टि, कड़ी मेहनत, लगन एवं कर्मठता से एक वट वृक्ष का रूप दिया अर्थात् उन्होंने एक मात्र शिक्षण संस्थान से बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय बनाया
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ADMISSIONS 2022